लेखिका : कामिनी सक्सेना
मैं एक इन्टरमीडिएट कालेज में अध्यापिका हूं। ये मात्र १२ वीं कक्षा तक का कालेज है। शाम को अक्सर मैं अपनी सहेली के साथ भोपाल ताल के किनारे घूमने निकल जाती हूं।
ऐसे ही एक दिन मैं अपनी सहेली के साथ ताल के किनारे घूम रही रही थी। १२वीं कक्षा की एक छात्रा और एक छात्र मिल गये। ये दोनो मेरी कक्षा में नहीं थे। दूसरे सेक्शन में थे।
मैने उनसे उनका नाम पूछा तो उन्होंने अपने नाम सोनल और किशोर बताए।
सोनल ने मुझे कहा कि उसे बायलोजी विषय में कुछ पूछना है।
मैने उसे कहा कि कल घर आ जाना, मै बता दूंगी। किशोर और सोनल दूसरे दिन घर पर आ गये।
मुझे लगा कि इनकी प्रोब्लम कुछ और ही है। मैंने पूछा- "सोनल ये किशोर तुम्हारा दोस्त है क्या…?"
"हां मैम … इसे भी आपसे कुछ पूछना था…" वो कुछ शरमाती सी बोली।
मैं एकदम भांप गई कि मामला प्य
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