प्रेषिका : हरामी चूत
आज उसका जन्मदिन था। वो काफ़ी उत्साहित थी। उसे पता था कि डैडी ने उसके जन्मदिन के लिए शाम को पार्टी रखी है। वो जल्दी जल्दी उ कर फ्रेश होकर हॉल में आ गई। जब वो हॉल में आई तो सिर्फ़ डैडी ही बै े थे। उसने डैडी को पूछा कि मम्मी कहाँ गयी तो डैडी ने कहा कि वो तोहफ़ा लेने को मार्केट गयी है। तो क्रांति ने डैडी को पूछा कि अप मेरे लिए तोहफ़ा नहीं लेकर आए?
डैडी ने क्रांति को गौर से देखा। क्रांति को महसूस हो रहा था कि डैडी क्रांति की चूचियों को नाइटी के ऊपर से देख रहे है। पर उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं की। डैडी ने कहा कि मेरा तोहफ़ा तो तुमको मम्मी की अनुपस्थिति में ही खोलना होगा।
क्रांति ने मासूमियत से कहा चलेगा ! आप दो तो सही !
डैडी ने कहा- ीक है तुम मेरे पास आकर बै ो और मैं तुमको एक सबसे अच्छा तोहफ़ा देता हूँ।
वो भोलेपन से अपने पापा क
........Read Full Story