लेखिका-प्रेषिका : नेहा वर्मा
मैं यानि मुग्धा, कविता और ऋतू पक्की सहेलियां हैं. हम तीनो की कोई बात आपस में किसी से छुपी नही रहती थी. हम तीनो में सबसे सुंदर मैं ही हूँ. पर कविता और ऋतू भी दिखने में सुंदर ही कहलाती हैं. कविता की शादी हुए २ साल हो चुके हैं. उसका एक बेबी बॉय भी है. कविता का पति एक तराशे हुए बदन का मालिक है. वो भी हमसे बहुत हिलमिल गया है. अक्सर ही हम लोग एक दूसरे के यहाँ पार्टी रखते हैं और साथ साथ हँसी मजाक करते हैं.
मेरी इच्छा भी अब होने लगी कि मैं भी अंकित के और करीब आऊँ. मुझे वो अच्छा भी लगता है.
मैंने अपनी और देखा. मेरा जिस्म भी सेक्सी है. मेरे स्तनों का उभार भी सुंदर है. गोलाई लिए सीधे ताने हुए, किसी को भी आकर्षित कर सकते हैं. मेरी कमर पतली है. मेरे चूतड थोड़े से भारी हैं. दोनों चूतडों की फांकें गोल और कसी हुयी हैं. चलते समय मेरी चूतडों की
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